top of page

मेरी रचनाएँ
Search


मैं और मेरे दोस्त, जम्मू में
दिनांक 9 फरवरी से 11 फरवरी 2026 तक मै बैंक के काम के सिलसिले में जम्मू में था। एक लंबे अंतराल के बाद अपने बैंक के पुराने सहयोगियों से मिलकर और पुरानी यादों को ताज़ा कर मन प्रसन्न हो गया। श्री राजकुमार बांबा जी, अनिल पण्डोह जी और अरुण गुप्ता जी हमेशा मेरे साथ रहे। जम्मू एयरपोर्ट से होटल तक तथा वापसी में होटल से एयरपोर्ट तक भी मेरे साथ रहे और मेरा ख्याल रखा। (करीब बीस साल पहले हमलोगों जम्मू मुख्य शाखा शालामार रोड जम्मू में कार्यरत थे) । तीनों साथियों को हृदय से धन्यवाद।
Kishori Raman
Mar 261 min read


तुम कहां जाओगे
तुम पहाड़ो को तोड़ते हो जल धाराओं को मोड़ते हो जंगलों को उजाड़ते हो जीव जंतुओं को मारते हो इन पापों का बोझ तुम कैसे उठाओगे ? आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जाओगे ? हीरे जवाहरात और खनिज बड़े लोग उठा ले जायेंगे तुम्हारे हिस्से में तो उजड़े, बंजर जमीन आयेंगे भूख से जब लोग मरेंगे बूंद बूंद पानी को तरसेगें जिमेदारियों से बच नहीं पाओगे मौत के दोषी तुम भी कहलाओगे पेड़ पौधे जीव जंतुओं के साथ रहते है हमारे पुरखों की आत्मायें जिन्होंने प्रकृति से सामंजस्य बैठाया हमे उनके साथ रहना सिखाया
Kishori Raman
Mar 231 min read


हमे पता ही न चला
आज हम भी डरते है अपना मुंह बंद रखते है चर्चा अगर करते भी हैं तो दबी जुबान में करते हैं कहने को यहां लोकतंत्र है और बोलने की आजादी है पर अ सहमति की बात किसी को नहीं सुहाती है देश इतना बदल गया और हमे पता ही न चला आज विरोध के स्वर कुचल दिए जाते है हक की बात करने वाले अर्बन नक्सल कहलाते हैं भ्रष्ट नेताओं को गरियाना इंकलाब का नारा लगाना अपने हक की बात करना जायज मांगों को उठाना कब से देशद्रोह ही गया हमे पता ही न चला हमारे संवैधानिक संस्थाएं सता के हथियार बन गए कलम,अख़बार दरबारी ह
Kishori Raman
Mar 171 min read


नमन और श्रद्धांजलि
दिनांक 05/01/2013 को मेरे पिता जी और दिनांक 08/01/2013 को मेरे माता जी का स्वर्गवास हुआ था। पुण्यतिथि पर माता जी और पिता जी को शत शत नमन और श्रद्धांजलि आज प्रस्तुत है एक कविता जिसका शीर्षक है लौट आओ तुम चली गई हमे छोड़ ये भुला नहीं पाता हूं याद कर अपना बचपन मैं आसूँ बहाता हूं तुम्हारे आँचल के छांव में बीता था मेरा कल अब तुम्हारे बिना खुद को लावारिस पाता हूं आपकी ऊंगली पकड़ हमने चलना सीखा था आपकी ममता ने मेरे तन मन को सींचा था मुसीबतें आई
Kishori Raman
Jan 71 min read
bottom of page