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तुम कहां जाओगे

  • Writer: Kishori Raman
    Kishori Raman
  • Mar 23
  • 1 min read

तुम पहाड़ो को तोड़ते हो

जल धाराओं को मोड़ते हो

जंगलों को  उजाड़ते हो

जीव जंतुओं को मारते हो

इन पापों का बोझ

तुम कैसे  उठाओगे ?

आने वाली पीढ़ी को

क्या देकर जाओगे ?


हीरे जवाहरात और खनिज

बड़े लोग उठा ले जायेंगे

तुम्हारे हिस्से में तो

उजड़े, बंजर जमीन आयेंगे

भूख से जब लोग मरेंगे

बूंद बूंद पानी को तरसेगें

जिमेदारियों से बच नहीं पाओगे

मौत के दोषी तुम भी कहलाओगे


पेड़ पौधे जीव जंतुओं के साथ

रहते है हमारे पुरखों की आत्मायें

जिन्होंने प्रकृति से सामंजस्य बैठाया

हमे उनके साथ रहना सिखाया

उन्हे चिर निद्रा से जगा कर

प्रकृति की बददुआ पाकर

क्या चैन से रह पाओगे

बताओ तुम कहां जाओगे ?


प्रकृति का अपना विधान होता है

जीव, जंतु, जंगल समान होता है

भू स्खलन, बाढ़ और सुखाड़

हमारे दुष्कर्मों का परिणाम होता है

जब दुनियां नही बचेगी तो

तुम कैसे बच पाओगे ?

दफ़न होने के लिए अपना ताबूत

बताओ  कहां से लाओगे ?


किशोरी रमण


             आप खुश रहे, स्वस्थ रहे और मस्त रहें।

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1 Comment


verma.vkv
verma.vkv
Mar 24

बहुत सुंदर रचना।

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