हमे पता ही न चला
- Kishori Raman

- Mar 17
- 1 min read

आज हम भी डरते है
अपना मुंह बंद रखते है
चर्चा अगर करते भी हैं तो
दबी जुबान में करते हैं
कहने को यहां लोकतंत्र है
और बोलने की आजादी है
पर अ सहमति की बात
किसी को नहीं सुहाती है
देश इतना बदल गया और
हमे पता ही न चला
आज विरोध के स्वर
कुचल दिए जाते है
हक की बात करने वाले
अर्बन नक्सल कहलाते हैं
भ्रष्ट नेताओं को गरियाना
इंकलाब का नारा लगाना
अपने हक की बात करना
जायज मांगों को उठाना
कब से देशद्रोह ही गया
हमे पता ही न चला
हमारे संवैधानिक संस्थाएं
सता के हथियार बन गए
कलम,अख़बार दरबारी हुए
सारे चोर पहरेदार बन गए
हमारे कानून की किताबें
न्यायविदों के सेल्फों में सज गए
नाम बदला, रंग बदले
इतिहास के मजमून बदल गए
कब हम विश्वगुरु बन गए
हमे पता ही न चला।
किशोरी रमण
आप खुश रहे, स्वस्थ रहे और मस्त रहें।
अगर ये पोस्ट आपको पसंद आया है तो इसे लाइक , फॉलो और शेयर करना न भूले। अपना कॉमेंट भी दें।
ब्लॉग का लिंक www.merirachnaye.com.in को याद रखें।



Very nice👌